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किसी व्यक्ति के जीवन में जब दैविक शक्ति का भाव आता है तब वह भगवान कहलाता है । वर्तमान समय में गुरुरूपी दैविक शक्ति के शरण जाने मात्र से ही " मानव जीवन का उद्देश " पूर्ण हो जाता है और सभी बंधनों से मुक्ति की प्राप्ति को ही मोक्ष कहते है ।
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मधुचैतन्य
[ अ.न.दी २०११ ]

।।जय बाबा स्वामी ।।

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