गुरूकाय॔
एक आत्मा ने अपने को आत्मा समझ करके परमात्मा के लिए किया गया काय॔ गुरूकाय॔ है ।यह काय॔ आप केवल आपके आत्मा के संतोष के लिए कर रहे है। यह आपके भीतर के "मै" के अहंकार को कम करने का सर्वोत्तम साधन हो, बशर्ते इसका दिखावा न किया जाए, नही तो यह एक बहुमूल्य अवसर हम खो देते है । इस प्रकार आत्मिक स्तर पर किया गया गुरूकाय॔ हमे आत्मिक आनंद देने के साथ चित्त की शुध्दी करता है ।
अपने आत्मा को प्रसन्न करने के लिए आप अपने गुरुमंत्र का जाप श्री गुरूशकती धाम मे आकर कर सकते है ।तो यह धाम ही गुरुमंत्र को सिध्द करके नीमाॅण किया है ।'एक गुरूवार को संकल्प किया और 'सात गुरूवार ' गुरुमंत्र का जाप किया है।इसी प्रकार से आप भी एक गुरूवार संकल्प की पाथ॔ना करे और 'सात गुरूवार ' आकर आप अनुभव करे । मुझे इसमे अनेक अच्छी अच्छी अनुभूतियाँ हुई है।
गुरुमंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं है । इसमे 800 सालों से गुरूशकति विद्यमान है। इस प्रकार आप भी इस प्रकार से आठ आठ गुरूवार की गुरुमंत्र साधना कर अपनी आत्मशांती की मनोकामना पूर्ण कर सकते है । यहा पर इस स्थानवीशेष का लाभ भी हमे साधना मे मिलेगा । इसे नवरात्री के समय करना अत्यधिक प्रभावशाली होगा क्योकि नवरात्री मे ही इसकी स्थापना भी हुई है। जाप मे संख्या का महत्व नही है, समय का महत्व नही है । महत्व - है -स्पष्ट मंत्र उच्चारण और आत्मीक समर्पण भाव का । आप जितना आसानी से कर सके, करे और आप स्वयं ही अनुभव ले।
चितशुध्दी इस प्रकार विशिष्ट स्थान पर , विशिष्ट समय पर , विशिष्ट मंत्र के जाप से भी हो सकती है । और शुध्द चित्त से निकली प्रार्थना परमात्मा तक पहुंचती है ।इसीलिए इसका बड़ा महत्व है ।
Aadhyatmik satya
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