मनुष्य की समस्या यह है कि उसे पूर्व जन्म याद नहीं रहता है
" मनुष्य की समस्या यह है कि उसे पूर्व जन्म याद नहीं रहता है और सदगुरु को सारे जन्म याद रहतेहैं। मनुष्य, पूर्व जन्म भूल जाने के कारण ,बार-बार,प्रत्येक
जन्म में वही गलती करता रहता है।सदगुरु को ,वह शिष्य क्या गलती करेगा,उससे क्या गलती हो सकती है ,उसका पूरा अंदाज होता है। पर उनकी भी एक सीमा होती है,वे उसके आगे कुछ नहीं कह सकते। वे संकेत देते हैं।शिष्य को वह संकेत समझना चाहिए क्योंकि सदगुरु स्पष्ट नहीं बता सकते हैं।प्रत्येक आत्मा की प्रगति एक-एक जन्म में एक-एक पदान की ही होती है।इसीलिए सदगुरु और शिष्य ,दोनों अपनी-अपनी गति
से ही चलते रहते हैं। इन दोनों के बीच का अंतर प्रत्येक जीवन में बढ़ते ही रहता है क्योंकि सदगुरु
की गति के जितनी शिष्य की गति नहीं होती है। शिष्य उसके साथ चलने का प्रयास करता है पर सदगुरु के प्रति समर्पित नहीं होता है। वास्तव में,समर्पित हो गया तो सदगुरु के गति के जितना तेज चलने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। चूँकि गुरु की गति से तो शिष्य कभी चल ही नहीं पाएगा,कहीं न कहीं छूटेगा ही ,इसलिए शिष्य का सदगुरु के प्रति पूर्ण समर्पित हो जाना ही अधिक श्रेयस्कर प्रतीत होता है।समझ लो,शिष्य ने प्रयत्न से तेज गति प्राप्त भी कर ली तो भी वह गति सदैव बनाई रखना बड़ा कठिन होता है। ठीक वैसे ही,मोक्ष की स्थिति प्राप्त करने से भी और कठिन उस स्थिति को बनाए रखना है। वह तो सदगुरु की सामूहिकता में ही संभव होता है।".....
हि.स.यो-४
पु-३३९
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