सदगुरु
मेरी परमात्मा की बाहरी खोज समाप्त हो गई और परमात्मा को अपने भीतर ही पाया । लेकिन भीतर की तरफ हम तब मुड़ते है , जब भीतर की दिशा की ओर मुड़ा हुआ मनुष्य हमारे जीवन में आता है । उसे भीतर जाने का मार्ग पता होता है और तभी वह दूसरे को वह मार्ग बता सकता है । वही मनुष्य मार्गदर्शक है , सदगुरु है । वह जबतक नही मिलता , हम बाहर ही सारी खोज करते है ।
परम पूज्य गुरुदेव
ही .का .स .योग
खंड - ५ पृष्ठ २९०
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