परमात्मा सारे विश्व में सकारात्मक रुप से बहता रहता है।

परमात्मा सारे विश्व में सकारात्मक रुप से बहता रहता है। जब हमारा चित्त संपूर्ण शुद्ध होता है और परमात्मा पर होता है, परमात्मा हमारे अंदर से बहने लग जाता है। और जो कार्य हमारे लिए संभव ही नहीं है, वह भी हमारे माध्यम से घटित हो जाता है। हमें भी आश्चर्य होता है कि इतना बडा कार्य मेरे हाथ से कैसे हो गया? क्या मालूम, इतना करने की तो मेरी क्षमता ही नहीं थी। यानि वह कार्य जो आप सोच ही नहीं सकते कि आप कर सकते हैं, वह भी आपके माध्यम से हो जाता है। यह तब होता है, जब आप अपना अस्तित्व उस माध्यम को कुछ क्षण, कुछ समय के लिए समर्पित कर देते हैं। अगर थोडे से समय समर्पित करने से इतने अच्छे परिणाम आते हैं, तो संपूर्ण समर्पित कर दिया, तो कितना अच्छा जीवन व्यतीत कर सकते हो! ईश्वर के अस्तित्व को मानने से हम सामूहिक शक्ति के साथ जुड जाते है ओर फिर हमारी कार्यक्षमता भी कई गुना बढ जाती है और बिना तनाव के ही बडे-से-बडा कार्य भी संपन्न हो जाता है।

- हि. स. यो. ३/ २४६

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