आज के युवा वर्ग को संतुलन की अत्यंत आवश्यकता है

आज के युवा वर्ग पर ही बढ़ते हुए 'बुद्धि का विकास' का प्रभाव पड़ रहा है। *बिना भाव के विकास तो केवल बुद्धि का विकास होगा।* यह तो बिना नींव के बने बिल्डिंग जैसा होगा। या समझ लो- पत्तों से बना बंगला होगा जो एक हवा के झोंके से भी गिर सकता है।

*आज के युवा वर्ग को संतुलन की अत्यंत आवश्यकता है। आप अगर युवा है तो आपको अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है, विशेष रूप से २०साल से ३५साल के बीच में हो।*

बुद्धि के अति विकास से आपके पास 'गति' आ गई है पर 'नियंत्रण' नहीं है। यही कारण है , युवा वर्ग के हाथ से 'दुर्घटनाएँ' अधिक हो रही हैं। टेक्नॉलॉजी भी गति को महत्व दे रही है, 'नियंत्रण' को नहीं। कहते हैं न , "एक तो करेला , ऊपर से निमचढ़ा।"

*हमारे शरीर में भी दो प्रकार की शक्तियाँ होती हैं। एक जो गति देती है, एक जो नियंत्रण रखती है। दोनों शक्तियों का संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है।* यह संतुलन करने का कार्य ही 'समर्पण ध्यान' में हो जाता है। आप यह भी कह सकते हो कि *समर्पण ध्यान 'लाईफ का मैनेजमेंट (जीवनप्रबंधक)' करता है।*

यह मैनेजमेंट में असंतुलन आ जाने से निम्नलिखित समस्याओं का निर्माण होता है:

क्रमशः ......

-- सद्गुरू के हृदय से, पृष्ठ:४९

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