सारा आत्मचिंतन आज करने की आवश्यकता है ।
सारा आत्मचिंतन आज करने की आवश्यकता है । अगर हुआ है तो फिर एक ही खोज है , उस खोज को मोक्ष कहते है । उस खोज को "मुक्त अवस्था " कहते है । मुक्त अवस्था से आशय ध्यान की एक उच्च स्थिति से है जिस स्थिति में जीवन में पाने के लिए कुछ भी बाकी नही रहता । दुसरा , आपके मन में किसी के भी प्रति कोई भी भावना नही रहती । कोई अच्छी भावना नही है । कोई बुरी भावना नही है । आप आपकी ही मस्ती में , आप आपके ही आनंद में मस्त है । ऐसी स्थिति आपको प्राप्त हुई है क्या ? अगर ऐसी स्थिति आपको प्राप्त हो गई है तो आप मुक्ति के , मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ रहे है । मोक्ष यानी वह मुक्त अवस्था , जिस मुक्त अवस्था में सारे ही बंधन , सारे ही शरीर के प्रभाव , सारे ही शरीर के इफेक्ट , सारे ही शरीर के दोष से परे हो गए । यानी शरीर है लेकिन शरीर नही है । शरीर का भाव । ही नही है ।...
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गुरुपुर्णिमा - २०१४
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