ध्यान करने से दो प्रकार की धटनाऍ धटती हैं।
ध्यान करने से दो प्रकार की धटनाऍ धटती हैं। प्रथम तो,खराब विचारों से शरीर के आसपास जो खराब ऊर्जा निर्माण हुई रहती है , वह इकट्टा होना बंद हो जाती है। और फिर जो खराब ऊर्जा जमा है , वह भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।दूसरा प्रभाव यह होता है - सपुर्ण खराब ऊर्जा समाप्त होना के बाद अच्छी , पवित्र , सकारात्मक ऊर्जा निर्माण होना शुरू होती है और धीरे-धीरे , वह सकारात्मक , अच्छी ऊर्जा इकट्टा होकर , अपने शरीर के आसपास अच्छी ऊर्जा का आभामंडल-सा बना देती है। और वह आभामंडल बन जाने के बाद नकारात्मक विचार नहीं आते हैं ।
-भाग १-- ३८०/३८१
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