जो दिख नहीं रहा है , उसे अनुभव करना ही परमात्मा की ओर एक कदम है।

जो दिख नहीं रहा है , उसे अनुभव करना ही परमात्मा की ओर एक कदम है। एक बार इस रास्ते पर चल दिए तो फिर सब जगह परमात्मा का अनुभव होना शुरू हो जाएगा । और फिर हमें अनुभव होगा - सारा विश्व ही परमात्ममय है , मैं ही मूर्ख उसे अनुभव नहीं कर पा रहा था। यह अनुभव करने का अभ्यास सद्गुरु के सान्निध्य में होता है।

-भाग १/२५५

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