ना हम निर्माण करते हैं और ना हम पालन करते हैं।

ना हम निर्माण करते हैं और ना हम पालन करते हैं। हम कुछ नहीं करते हैं, पर सब कुछ हो जाता है। अपने आप को विकसित करने का विचार भी नहीं आएगा और न अपने आप को विकसित करने का प्रयास करोगे। यह प्रयास ही हमारा अस्तित्व छोटा कर देता है। प्रयास मत करो, केवल प्रवाह बनो! प्रयास तुम्हें परमात्मा से अलग करेगा  , प्रवाह परमात्मा में लीन कर देगा। प्रवाह बनो प्रवाह  ! समझे !

हिमालय का समर्पण योग -२ पृष्ठ १७१

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