गुरुलोक
इस साधना में कई दिन लगते है। लेकिन इतने दिनों तक शरीर मूत ही पड़ा रहता है। वास्तव में , मूत नहीं होता लेकिन मूत जैसी ही अवस्था में होता है। इसलिए उस शरीर की सुरक्षा करना अत्यंत आवश्यक होता है। क्योंकि वापस आत्मा उस शरीर में कब आएगी इसका कोई निच्छित समयावधि नहीं होती है। उतनी अवधि तक उस शरीरों की देख-भाल और सुरक्षा करना आवश्यक होता है। सामान्यतया इस साधना में आत्माएँ गुरुलोक तक यात्रा करके वापस आती हैं। लेकिन वापस आने का निर्णय सामूहिक होता है। आत्माएँ सामुहिकता में ही जाती है, सामुहिकता में ही यात्रा करती हैं और सामुहिकता में ही वापस आती हैं।
भाग ६ - १००/१०१
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