मनुष्य के जीवन का उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति

मनुष्य के जीवन का उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति करना है | और मनुष्य अपने जीवन में सब भोग विलासों से मुक्त होकर ,बड़े धीरे -धीरे इन सभी सांसारिक क्रियाकलापों से मुक्त होता है | यानि मनुष्य को मुक्ति एक क्रम से मिलती है ; पहले जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से मुक्ति , फिर सामान्य जीवनयापन से मुक्ति ,फिर भोग विलास से मुक्ति | मुक्ति यानि उनमे से गुजरना है क्योंकि अब तक उनमे से गुजरेंगे नहीं ,पता कैसे चलेगा की यह वह स्थान नहीं है जिसे खोजने के लिए मेने जन्म लिया था ?
गुरुवर , मनुष्य सत्य की तलाश में कितनी ही मिथ्या बातों से गुजरता है | उस शाश्वत की खोज में बहुत  सा अशाश्वत पाना पड़ता है ,लेना पड़ता है और हर स्थान से गुजरकर मुक्त होना पड़ता है | ठीक उसी प्रकार से मोक्ष की भी एक स्तिथि है ,उस स्तिथि में पहुंचकर स्वयं को बहार निकलना पड़ता है | मोक्ष की स्तिथि पानी पड़ती है और पाने के बाद वही स्तिथि वैसी की वैसी दूसरे को देनी पड़ती है | यानी वास्तव में मोक्ष की स्तिथि पाने में मोक्ष नहीं है ,वह मोक्ष की स्तिथि दूसरे को देने में मोक्ष है | यानी मोक्ष की  स्तिथि से मुक्त होना ही मोक्ष है |

हि.स.यो.२/१२८

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