आत्मा धीरे-धीरे अपने शरीर में वापस आई।

मेरे आत्मा धीरे-धीरे अपने शरीर में वापस आई। उस एक चांदीनुमा तार के माध्यम से और वापस आते समय आत्मा की गति एकदम धीरे-धीरे थी। जबकि ऊपर माँ की आत्मा के साथ जाते समय गति अधिक थी। लेकिन वापस आते समय प्रक्रिया बहुत ही धीमी थी। आत्मा का वापस शरीर में आना , यह प्रक्रिया आत्मा के स्वभाव के विरूद्ध है। इसलिए शायद वापस आने की गति अत्यंत धीमी थी। यह जो क्रिया वह ध्यानसाधना की ही एक प्रक्रिया है। यह भी एक साधन का ही प्रकार होता है। यह जितना आसान बताया, उतना आसान है नहीं। क्योंकि इस साधना में आकाश में शरीर से निकलकर जाना आसान होता है लेकिन वापस आना अत्यंत कठीण होता है। क्योंकि शरीर को आसानी से छोड़ना आत्मा का स्वभाव है लेकिन उसी शरीर में वापस आना , आत्मा के स्वभाव के विरुद्ध होता है।

भाग ६ - ९८/९९

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami