सबकुछ मानने पर ही निभर्र है।

समपर्ण ध्यान में जुड़ने के साथ-साथ यह बात भी साधको को ध्यान रखनी चाहिए की यहाँ सबकुछ मानने पर ही निभर्र है। आप आपको भविष्य कैसा बनना चाहते हो। वह आपके हाथ में है। अगर आप अच्छा सोचोगे गुरुशक्तियाँ अच्छा भविष्य बनाएगी। आप बुरा सोचोगे बुरा भविष्य बनाएगी। आपके सोचने पर ही आपका सारा भविष्य निभर होगा। सारा आपके " समर्पण" और "चित" का कमाल है। आप कहॉ हो,किस जगह हो उसे कोई महत्य नही है।आपका चित्त कहाँ है, किस जगह किसके साथ हे, उस पर ही सबकुछ निभर है। अगर आप नर्क में है और आपका चीत 'स्वग' में है, तो धीरे-धीरे आप नर्क को भी स्वग बना सकते है। लेकिन आप बना सकते है यह आप जानते ही।नहीं है।

जुलाई,
मधुचेतन्य 2009

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