गुरु कृपा

हे गुरुवर , तेरे चरणों में ,
सुख अतुलित हम पाए हैं...
सर रखकर तेरे चरणों मैं ,
हमने अश्रु बहुत ही बहाए हैं...
जब-जब दुःख आया हम पर ,
हाथ तूने पसवारे हैं...
जब-जब डोली जीवन नैया ,
ये नैया तूने सँभाली है...
रोम-रोम है ऋणी तेरा ,
तूने अंतर हमारा निखार है...
आपकी कृपा अपार हुई गुरुवर ,
चाक चढ़ाकर सँवारा है...

          राजेन्द्र मेहता , भावनगर

मधुचैतन्य
Sep-Oct , 2017
Pg.58

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