आत्मदीपक

अपना आत्मदीपक जलाने के लिए पहले मनुष्य को शांत वातावरण की आवश्यकता होती है ताकि मनुष्य अपने भीतर जाँक सके, अपनी आत्मा का अहसास कर सके, अपनी आत्मा के महत्व को समझ सके और अपनी आत्मा के सान्निध्य में जा सके।

HSY 1 pg 327

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami