इस स्थान पर कभी मृत्यु नहीं होती है

मेरी जिज्ञासा जागृत हुई और मैंने श्री पारसनाथजी से पूछा-इन मुनियों में आपका गुरुजी कोन से हैं?वे बोले, "नहीं, गत वर्ष ही उन्होंने देहत्याग कर दिया।इस स्थान पर कभी मृत्यु नहीं ' होती ' है,एक पूर्णत्व की स्थिति  पाने के बाद वे स्वेच्छा से खाना-पीना बंद करके समाधि की अवस्था में रहते हुए देहत्याग कर देते हैं। और ऐसा ही मेरे गुरुजी भी ने भी किया। और वे बोले थे,"अब जीवन में पाने के लिए कुछ भी नहीं रह गया है। मैं मोक्ष की स्थिति पाने के बाद तेरे लिए अटका हुआ था। अब जब तुझे भी वह स्थिति  प्राप्त हो गई है तो मैं एक जिम्मेदारी से मुक्त्त हो गया हूँ।इतने विश्वास से संपूर्ण जीवन तू ने मुझे समर्पित किया और कभी  भी जताया नहीं कि कि तूने  तेरा संपूर्ण जीवन मुझे समर्पित किया है। लेकिन  मुझे इस बात का ध्यान था कि तुमने सारा जीवन ही मुझे दिया है। मैं तो ईश्वर से प्रार्थना करता था कि मुझे मोक्ष की स्थिति जीवन में नहीं मिला तो भी चलेगा,मैं दूसरा जन्म ले लूँगा लेकिन मेरे पारसनाथ को अवश्य वह स्थिति प्रधान कर। शायद तुझे देने की इच्छा के कारण ही वहस्थिति मुझे प्राप्त हुई होगी। अब तुझे सुरक्षित कर देने के बाद तो मेरे जीवन में कोई उद्देश ही नहीं रह गया।अब रह कर भी मैं क्या करूँगा?मैं जब तक रहूँगा,तुझे मेरी सेवा करनी होगी क्योंकि मेरा शरीर कमजोर हो चुका है। तुझे भी अपनी साधना के लिए समय नहीं मिल पाएगा। और इस कमजोर शरीर से अब मैं भी थक गया हूँ।...

हि.स.यो-४                   
पु-३८१

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