सदगुरु को व्यवहारिक ज्ञान नहीं होता।
सदगुरु को व्यवहारिक ज्ञान नहीं होता। क्या करना चाहिए , क्या नहीं करना चाहिए , क्या अच्छा दिख सकता है , क्या नहीं दिख सकता इस प्रकार के ज्ञान से परे वह होता है। सदगुरु प्रायः अपने दोषों की ही आपके सामने प्रथम रखेगा, यही तुम्हारा परीक्षा-समय है। उन दोषों के परे झांकना होगा। ऐसे समय आप आपका चित्त क्या दिख रहा है वह मत देखो । क्या अनुभव हो रहा है , वह देखो । दिखना तो आँखो का धोखा है ।
आध्यात्मिक सत्य
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