आध्यात्मिक प्रगती
सदभावनासे भरा हुआ मनुष्य चाहे, न चाहे, उसकी आध्यात्मिक प्रगती प्रतिक्षण होती जायेगी क्योंकी वह प्रत्येक सांस सकारात्मक लेगा। जब प्रत्येक सांस सकारात्मक लेगा तो उसका जीवन तो सकारात्मक होगा ही। कहते है की दुनिया गोल है जो दोगे वही वापस मिलेगा। सकारात्मक कार्य करना और निस्वार्थ भाव से करना आध्यात्मिक प्रगती स्वयम ही करा देता है।
हि.स.यो.भा. ३.
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