नियमितता और सामूहिकता

" दो बातें  अवश्य या रखो, एक है- *नियमितता* और दूसरी बात है- *सामूहिकता*। अपने ध्यान में सदैव नियमितता रखो;  कभी किया तो कमी नहीं किया, ऐसा न हो। रोज नियमित 30 मिनट तो  ध्यान सुबह  करो ही। नहीं किया ऐसा नहीं होना चाहिए।
दूसरा, सुबह का ध्यान हमारी आध्यात्मिक प्रगति करता है या ये समझे कि सुबह ध्यान करके हम शक्तियाँ प्राप्त करते हैँ। और शाम को ध्यान करके हम शक्तियाँ बाँटते है, श्याम का ध्यान सामूहिकता मैं करोगे तो आपके माध्यम से दान होगा और जो आपके हाथ से दान होगा, आपका वही वृद्धिगत होगा।"

हि.स.योग.6-पेज.271.

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