मैं एक खाली पाईप हूँ।

जब ध्यान करने बैठा तो लगा, मैं एक खाली पाईप हूँ। पानी एक ओर से आ रहा है दूसरी ओर जा रहा है और पानी जैसा चैतन्य का प्रवाह लगातार गुरुओं से आ रहा था और वातावरण में जा रहा था। यह क्या हो रहा था , मुझे पता नहीं चल रहा था। लेकिन मैं केवल एक दर्शक जैसा सब कुछ देख रहा था। बाद में जो चैतन्य शरीर से निकल रहा था, उसने एक बवंडर का रुप ले लिया। बवंडर बाहर की ओर था और उसका आकार प्रतिक्षण बठते ही जा रहा था और चित से यह सब महसूस कर रहा था। उस बवंडर ने सारा जोधपुर शहर को व्याप लिया और वह ऊपर और ऊपर की ओर जा रहा था और वह इतना ऊपर चला गया कि शहर भी ऊपर से नहीं दिख रहा था। बाद में वह बवंडर पाकिस्तान की दिशा में चला गया। थोड़ी देर बाद सब शांत हो गया और बाद में धीरे सब एकदम शांत-शांत लग रहा था। कुछ देर बाद मैंने आँखे खोलकर देखा तो पत्नी औऱ बच्चे मेरे उठने की राह देख रहे थे। मैंने धीरे से पूछा , ज्यादा देर तो नहीं हो गई ? पत्नी बोली , पता नहीं , पर हम यहाँ काफी देर से आकर बैठे हुए हैं। अब शाम हो गई थी और हम उस जोधपुर के किले से नीचे उतर रहे थे। बच्चे भी आगे-आगे भाग रहे थे और हम दोनों एक कुण्डलिनी के चित्र के बारे में चर्चा जर रहे थे।  हमने एक प्राचीन पेन्टीग में कुण्डलिनी माता का और चक्रो का चित्र देखा था। पत्नी बोली , किसे ने अनुभूति की होगी तभी वह अपनी अनुभूति अपने चित्र मे दिखा स्का।

भाग - ६ - १२७

Comments

Popular posts from this blog

Subtle Body (Sukshma Sharir) of Sadguru Shree Shivkrupanand Swami

Shivkrupanand Swami