सानिध्य

"गुरुशक्तियाँ "आप तक पहुँच गई है । अब माध्यम का कार्य समाप्त हो गया है तो अब आप अभी भी माध्यम को ही क्यों पकड़े हो ?उसके  परे जाने की कोशिश करो , उससे परे जाने की इच्छा करो । जो अनुभूति प्राप्त हुई है , उसका उपयोग केवल शरीर और शरीर की आवश्यकताएँ पूर्ण करने के लिए मत करो । क्योँकि यह शरीर तो न था और न रहेगा । लेकिन "मोक्ष "की इच्छा थी और बाद में भी रहेगी ।

आपका
बाबास्वामी                 
9/2/2012

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