समर्पण आश्रम

पूज्य गुरूदेव  - " आश्रम  भी आते हो  या  गुरूशक्तिधाम  ..... तो  अपनी  प्रीपरेशन ( तैयारी )  करो  न !
आने  की  हड़बड़  , हड़बड़  , हड़बड़  मत  करो  |  शांति  के  साथ  आओ  , शांति  के  साथ
ग्रहण  करो  , शांति  के साथ  उसको  संजोकरके  रख  सकते  हो  | ... कि  कुछ  अच्छा  मिला  है  न  , उसको  संजोकरके  रखा  , उसको  संभाल करके  रखा  | लेकिन  ये  संभालकरके  तब  रखोगे   जब  आप  ग्रहण  करोगे  |
आपको  पूछा  -- खाना  कैसे  रहा  ?
जब  आपने  खाना  स्वाद  के  साथ  खाया है तो  बता  सकतेे  हो  कि खाना  कैसा रहा  |
आपने  हड़बड़  - हड़बड़  करके  खाया  तो  कैसे  मालुम  खाना  कैसा  रहा  ?
तो  ठीक  उसी  प्रकार  से  कहीं के भी  दर्शन  की  एनर्जी  , दर्शन  की ऊर्जा  .. अभी  पाँचवी पुस्तक  आ रही है  न  , उसके  अंदर   ' गुरू के पास  कैसे  जाना  '  इस उपर  बहुत  कुछ  लिखा  है  |
तो  कहने  का  मतलब  , कहीं  भी  जाने से  पहले  , उस  स्थिति  को  ग्रहण  करो  |  तो  आश्रम  भी  आते  हो  कि  नहीं  ?
तो  आते  समय एक  , अपनी  स्थिति  बनाकरके  आओ  कि  अपने  आश्रम  जाने  का  ,,
आश्रम  से  ऊर्जा  ग्रहण  करने की  |  अपने  उद्देश  को  याद  रखो  और  थोड़ी  देर  बेलेन्स  करके  ,  संतुलित  करते......   कहीं  तो  सिनेमा  की  टोकीझ  में  घुस  रहे  हैं  ,  ऐसे  नहीं  घुसने  का  उसमें  |  तो  शांति  के  साथ  जाकर  के  , शांति  के  साथ  ग्रहण  करो..
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( मघु चैतन्य | नवंबर - दिसंबर , 2017 )

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