जीवन एक यात्रा
यह जीवन एक यात्रा है । और आत्मा एक यात्री ; वह भी मार्ग से अपरिचित है । उसे भी सत्व , रज , तमरूपी तीन चोर पकड़ लेते है । तमोगुण [क्रोध , अहंकार , इत्यादि ]रूपी चोर हमारा नाश करता है । रजोगुण [काम , मोह , लोभ ]रूपी चोर हमें बंधन में बाँधकर रखता है -इस जग में मुग्ध रखता है । किन्तु तीसरा चोर अर्थात सत्व गुण काम , क्रोध , मद , मोह , लोभरूपी बंधनों से आत्मा को मुक्त कर गुरुगृह का रास्ता दिखाता है । रास्ता मिलने पर गुरु से ज्ञान प्राप्त करना अथवा पुनः जीवन -अरण्य में भटकना आत्मा की इच्छा पर निर्भर है ।
आपकी
गुरुमाँ
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